विमोचनमुपस्पृश्य जितमन्युर्जितेन्द्रिय:।
प्रतिग्रहकृतैर्दोषै: सर्वै: स परिमुच्यते॥ १६१॥
अनुवाद
जो मनुष्य विमोचन तीर्थ में स्नान करता है और जल से कुल्ला करता है तथा अपने क्रोध और इन्द्रियों को वश में करता है, वह समस्त कामनाजन्य दोषों से मुक्त हो जाता है ॥161॥
A person who takes bath and rinses his mouth with water at the Vimochan Tirtha and controls his anger and senses, becomes free from all the evils caused by desires. ॥161॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥