Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.83.161: जो मनुष्य विमोचन तीर्थ में स्नान करता है और जल से कुल्ला करता है तथा अपने क्रोध और इन्द्रियों को वश में करता है, वह समस्त कामनाजन्य दोषों से मुक्त हो जाता है ॥161॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 161
 
 
श्लोक  3.83.161 
विमोचनमुपस्पृश्य जितमन्युर्जितेन्द्रिय:।
प्रतिग्रहकृतैर्दोषै: सर्वै: स परिमुच्यते॥ १६१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य विमोचन तीर्थ में स्नान करता है और जल से कुल्ला करता है तथा अपने क्रोध और इन्द्रियों को वश में करता है, वह समस्त कामनाजन्य दोषों से मुक्त हो जाता है ॥161॥
 
A person who takes bath and rinses his mouth with water at the Vimochan Tirtha and controls his anger and senses, becomes free from all the evils caused by desires. ॥161॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)