Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.83.152-153h: वहाँ स्नान करके तीन रात्रि उपवास करने से मनुष्य ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, उस मनुष्य को अग्निष्टोम और अतिरात्रय यज्ञों का फल भी मिलता है। हे भरतश्रेष्ठ! वह अपने कुल की सात पीढ़ियों को पवित्र कर देता है। 152 1/2। | mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ स्नान करके तीन रात्रि उपवास करने से मनुष्य ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, उस मनुष्य को अग्निष्टोम और अतिरात्रय यज्ञों का फल भी मिलता है। हे भरतश्रेष्ठ! वह अपने कुल की सात पीढ़ियों को पवित्र कर देता है। 152 1/2।
By bathing there and fasting for three nights, one is freed from the sin of killing a brahmin. Not only this, that person also gets the fruits of Agnishtom and Atiratraya yagnas. O best of the Bharatas! He purifies seven generations of his family. 152 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥