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mahabharat 3.83.150: भरतश्रेष्ठ! वहाँ मधुश्रवा तीर्थ है। राजन! उसमें स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान का फल मिलता है। 150॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  3.83.150 
मधुस्रवं च तत्रैव तीर्थं भरतसत्तम।
तत्र स्नात्वा नरो राजन् गोसहस्रफलं लभेत्॥ १५०॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! वहाँ मधुश्रवा तीर्थ है। राजन! उसमें स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान का फल मिलता है। 150॥
 
Bharatshrestha! There is Madhusrava Tirtha. Rajan! By taking bath in it, a person gets the result of thousand Godan. 150॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)