श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  3.83.149 
तत्र स्नात्वा दिवं यान्ति येऽपि पापकृतो नरा:।
पृथूदके नरश्रेष्ठ एवमाहुर्मनीषिण:॥ १४९॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! पृथुदा तीर्थ में स्नान करने से पापी मनुष्य भी स्वर्ग को जाते हैं, ऐसा बुद्धिमान पुरुष कहते हैं ॥149॥
 
Male best! Even sinful people go to heaven by taking bath in Prithuda Tirtha, this is what wise men say. 149॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)