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mahabharat 3.83.147: भगवान् सनत्कुमार और महात्मा व्यास ने ऐसा कहा है । राजन् ! इस प्रकार तीर्थयात्री को नित्य पृथूदकतीर्थ का दर्शन करना चाहिए । 147॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  3.83.147 
गीतं सनत्कुमारेण व्यासेन च महात्मना।
एवं स नियतं राजन्नभिगच्छेत् पृथूदकम्॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
भगवान् सनत्कुमार और महात्मा व्यास ने ऐसा कहा है । राजन् ! इस प्रकार तीर्थयात्री को नित्य पृथूदकतीर्थ का दर्शन करना चाहिए । 147॥
 
Lord Sanatkumar and Mahatma Vyas have said this. Rajan! In this way the pilgrim should visit Prithudakatirtha regularly. 147॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)