श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  3.83.145 
पुण्यमाहु: कुरुक्षेत्रं कुरुक्षेत्रात् सरस्वती।
सरस्वत्याश्च तीर्थानि तीर्थेभ्यश्च पृथूदकम्॥ १४५॥
 
 
अनुवाद
कुरुक्षेत्र तीर्थ को सबसे पवित्र कहा गया है। कुरुक्षेत्र से भी पवित्र सरस्वती नदी है। सरस्वती से भी पवित्र उसके तीर्थ हैं और उन तीर्थों से भी पवित्र पृथूदक है। 145.
 
The pilgrimage of Kurukshetra is said to be the holiest of all. Even holier than Kurukshetra is the river Saraswati. Even holier than Saraswati are its pilgrimage sites and even holier than those pilgrimage sites is Prithudak. 145.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)