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mahabharat 3.83.138: हे पुरुषश्रेष्ठ! वहाँ से अग्नितीर्थ जाओ। उसमें स्नान करने से मनुष्य अग्निलोक में जाकर अपने कुल का उद्धार करता है ॥138॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 138
 
 
श्लोक  3.83.138 
अग्नितीर्थं ततो गच्छेत् तत्र स्नात्वा नरर्षभ।
अग्निलोकमवाप्नोति कुलं चैव समुद्धरेत्॥ १३८॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! वहाँ से अग्नितीर्थ जाओ। उसमें स्नान करने से मनुष्य अग्निलोक में जाकर अपने कुल का उद्धार करता है ॥138॥
 
Male best! From there go to Agnitirtha. By bathing in it, a person goes to the world of fire and saves his family. 138॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)