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mahabharat 3.83.136: भरत! शुक्राचार्य को प्रसन्न करने के लिए भगवान कार्तिकेय भी तीनों संध्याओं में वहाँ सदैव उपस्थित रहते हैं ॥136॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.83.136 
कार्तिकेयश्च भगवांस्त्रिसंध्यं किल भारत।
सांनिध्यमकरोन्नित्यं भार्गवप्रियकाम्यया॥ १३६॥
 
 
अनुवाद
भरत! शुक्राचार्य को प्रसन्न करने के लिए भगवान कार्तिकेय भी तीनों संध्याओं में वहाँ सदैव उपस्थित रहते हैं ॥136॥
 
Bharata! To please Shukracharya, Lord Kartikeya is also always present there during the three evenings. ॥ 136॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)