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mahabharat 3.83.131: ‘महादेव! आपकी कृपा से मेरा तप नष्ट न हो।’ तब महादेवजी प्रसन्न होकर महर्षि से बोले- ॥131॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  3.83.131 
त्वत्प्रसादान्महादेव तपो मे न क्षरेत वै।
ततो देव: प्रहृष्टात्मा ब्रह्मर्षिमिदमब्रवीत्॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
‘महादेव! आपकी कृपा से मेरा तप नष्ट न हो।’ तब महादेवजी प्रसन्न होकर महर्षि से बोले- ॥131॥
 
'Mahadev! May my penance not be destroyed by your grace.' Then Mahadevji became happy and said to Maharishi - ॥ 131॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)