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mahabharat 3.83.128: फिर जब प्रलयकाल आता है, तब आप स्वयं ही समस्त प्राणियों को खा जाते हैं। देवता भी आपके स्वरूप को नहीं जान पाते, फिर मैं क्या जान सकता हूँ?॥128॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  3.83.128 
त्वमेव सर्वान् ग्रससि पुनरेव युगक्षये।
देवैरपि न शक्यस्त्वं परिज्ञातुं कुतो मया॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
फिर जब प्रलयकाल आता है, तब आप स्वयं ही समस्त प्राणियों को खा जाते हैं। देवता भी आपके स्वरूप को नहीं जान पाते, फिर मैं क्या जान सकता हूँ?॥128॥
 
‘Then when the time of destruction comes, you yourself devour all living beings. Even the gods cannot know your form, then what about me?॥ 128॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)