Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.83.121: धर्मज्ञ महर्षि! मुनिप्रवर! आप क्यों नाच रहे हैं? आज आपके इस अत्यन्त हर्ष का कारण क्या है?   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  3.83.121 
भो भो महर्षे धर्मज्ञ किमर्थं नृत्यते भवान्।
हर्षस्थानं किमर्थं वा तवाद्य मुनिपुङ्गव॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
धर्मज्ञ महर्षि! मुनिप्रवर! आप क्यों नाच रहे हैं? आज आपके इस अत्यन्त हर्ष का कारण क्या है?
 
‘Dharmagya Maharishi! Munipravar! Why are you dancing? What is the reason for your extreme joy today?’
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)