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mahabharat 3.83.120: "हे प्रभु! आप कृपा करके उसके इस नृत्य को रोकने के लिए कुछ कीजिए।" देवताओं का कल्याण करने की इच्छा से महादेव जी हर्ष से नाचते हुए ऋषि के पास गए और इस प्रकार बोले - ॥120॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  3.83.120 
नायं नृत्येद् यथा देव तथा त्वं कर्तुमर्हसि।
तं प्रनृत्तं समासाद्य हर्षाविष्टेन चेतसा।
सुराणां हितकामार्थमृषिं देवोऽभ्यभाषत॥ १२०॥
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु! आप कृपा करके उसके इस नृत्य को रोकने के लिए कुछ कीजिए।" देवताओं का कल्याण करने की इच्छा से महादेव जी हर्ष से नाचते हुए ऋषि के पास गए और इस प्रकार बोले - ॥120॥
 
"O Lord! Please do something to stop this dance of his." With the desire of doing good for the gods, Mahadev Ji went to the sage dancing with joy and said thus - ॥120॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)