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mahabharat 3.83.119: राजन! नरेश्वर! उस समय ब्रह्मा, अन्य देवता तथा तपोधन महर्षि सभी ने महादेवजी से मनकणक मुनि के विषय में निवेदन किया। 119॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  3.83.119 
ब्रह्मादिभि: सुरै राजन्नृषिभिश्च तपोधनै:।
विज्ञप्तो वै महादेव ऋषेरथ नराधिप॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
राजन! नरेश्वर! उस समय ब्रह्मा, अन्य देवता तथा तपोधन महर्षि सभी ने महादेवजी से मनकणक मुनि के विषय में निवेदन किया। 119॥
 
Rajan! Nareshwar! At that time, Brahma, other deities and Tapodhan Maharishi all requested Mahadevji about Mankanak Muni. 119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)