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mahabharat 3.83.113-114h: राजेन्द्र! इसके बाद परम ब्रह्मतीर्थ में जाओ। वहाँ स्नान करने से ब्राह्मणेत्तर जाति का व्यक्ति भी ब्राह्मणत्व प्राप्त कर लेता है। यदि ब्राह्मण का मन शुद्ध हो, तो वह परम गति को प्राप्त कर लेता है। 113 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 113-114h
 
 
श्लोक  3.83.113-114h 
ततो गच्छेत राजेन्द्र ब्रह्मणस्तीर्थमुत्तमम्।
तत्र वर्णावर: स्नात्वा ब्राह्मण्यं लभते नर:॥ ११३॥
ब्राह्मणश्च विशुद्धात्मा गच्छेत परमां गतिम्।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! इसके बाद परम ब्रह्मतीर्थ में जाओ। वहाँ स्नान करने से ब्राह्मणेत्तर जाति का व्यक्ति भी ब्राह्मणत्व प्राप्त कर लेता है। यदि ब्राह्मण का मन शुद्ध हो, तो वह परम गति को प्राप्त कर लेता है। 113 1/2॥
 
Rajendra! After that go to the supreme Brahmatirtha. By taking bath there, even a person of non-Brahmin caste attains Brahmin status. If a Brahmin has a pure mind, he attains the ultimate goal. 113 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)