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mahabharat 3.83.112: हे धर्मात्मा! उसके बाद उत्तम कन्यातीर्थ में जाओ। कन्यातीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान का फल मिलता है ॥112॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  3.83.112 
ततो गच्छेत धर्मज्ञ कन्यातीर्थमनुत्तमम्।
कन्यातीर्थे नर: स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
हे धर्मात्मा! उसके बाद उत्तम कन्यातीर्थ में जाओ। कन्यातीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान का फल मिलता है ॥112॥
 
Religious! After that, go to the supreme Kanyatirtha. By taking bath in Kanyatirtha, a person gets the fruit of thousand Godan. 112॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)