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mahabharat 3.83.108: भरतसत्तम नरश्रेष्ठ! श्री कुंज नामक सरस्वती तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को अग्निष्टोमयज्ञ का फल प्राप्त होता है। 108॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  3.83.108 
श्रीकुञ्जं च सरस्वत्यास्तीर्थं भरतसत्तम।
तत्र स्नात्वा नरश्रेष्ठ अग्निष्टोमफलं लभेत्॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
भरतसत्तम नरश्रेष्ठ! श्री कुंज नामक सरस्वती तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को अग्निष्टोमयज्ञ का फल प्राप्त होता है। 108॥
 
Bharatsattam Narashrestha! By taking bath in Saraswati Teertha named Shri Kunj, a person attains the results of Agnishtomayagya. 108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)