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mahabharat 3.83.102: वहाँ महादेवजी का पूजन करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है। देवीतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य हजार गोदान का फल प्राप्त करता है ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  3.83.102 
अर्चयित्वा महादेवमश्वमेधफलं लभेत्।
देव्यास्तीर्थे नर: स्नात्वा गोसहस्रफलं लभेत्॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महादेवजी का पूजन करने से मनुष्य अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है। देवीतीर्थ में स्नान करने से मनुष्य हजार गोदान का फल प्राप्त करता है ॥102॥
 
By worshiping Mahadevji there, a person gets the results of Ashwamedha Yagya. By taking bath in Devitirtha, a person gets the result of thousand Godan. 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)