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mahabharat 3.83.1: पुलस्त्यजी कहते हैं- राजेन्द्र! उसके बाद ऋषियों द्वारा प्रशंसित कुरुक्षेत्र में जाओ, जिसके दर्शन मात्र से सभी प्राणी पापों से मुक्त हो जाते हैं॥1॥   |   mahabharat अध्याय 3.83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 83: कुरुक्षेत्रकी सीमामें स्थित अनेक तीर्थोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.83.1 
पुलस्त्य उवाच
ततो गच्छेत राजेन्द्र कुरुक्षेत्रमभिष्टुतम्।
पापेभ्यो यत्र मुच्यन्ते दर्शनात् सर्वजन्तव:॥ १॥
 
 
अनुवाद
पुलस्त्यजी कहते हैं- राजेन्द्र! उसके बाद ऋषियों द्वारा प्रशंसित कुरुक्षेत्र में जाओ, जिसके दर्शन मात्र से सभी प्राणी पापों से मुक्त हो जाते हैं॥1॥
 
Pulastyaji says- Rajendra! After that, visit Kurukshetra, praised by the sages, by the mere sight of which all living beings are freed from sins. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)