Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.97-100: उस पर प्रसन्न होकर भगवान ने उसे अष्टगुण-ऐश्वर्य अर्थात् अणिमा आदि आठ सिद्धियाँ प्रदान कीं। महाराज! तत्पश्चात उसकी इच्छानुसार अन्य वर प्रदान करके भगवान केशव वहाँ से उसी प्रकार अन्तर्धान हो गए, जैसे बादलों में बिजली लुप्त हो जाती है। भारतवर्ष! इसीलिए वह तीर्थ सप्त-चारुका नाम से तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। वहाँ अग्नि के लिए दिया गया चरु एक लाख गौओं, सौ राजसूय यज्ञों तथा एक हजार अश्वमेध यज्ञों से भी अधिक फलदायी है। राजेन्द्र! वहाँ से लौटकर रुद्रपद नामक तीर्थस्थान पर जाओ। वहाँ महादेवजी का पूजन करके पुरुष तीर्थयात्री अश्वमेध का फल प्राप्त करता है। | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस पर प्रसन्न होकर भगवान ने उसे अष्टगुण-ऐश्वर्य अर्थात् अणिमा आदि आठ सिद्धियाँ प्रदान कीं। महाराज! तत्पश्चात उसकी इच्छानुसार अन्य वर प्रदान करके भगवान केशव वहाँ से उसी प्रकार अन्तर्धान हो गए, जैसे बादलों में बिजली लुप्त हो जाती है। भारतवर्ष! इसीलिए वह तीर्थ सप्त-चारुका नाम से तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। वहाँ अग्नि के लिए दिया गया चरु एक लाख गौओं, सौ राजसूय यज्ञों तथा एक हजार अश्वमेध यज्ञों से भी अधिक फलदायी है। राजेन्द्र! वहाँ से लौटकर रुद्रपद नामक तीर्थस्थान पर जाओ। वहाँ महादेवजी का पूजन करके पुरुष तीर्थयात्री अश्वमेध का फल प्राप्त करता है।
Being pleased with him, God gave him eight siddhis like Ashtaguna-Aishwarya i.e. Anima etc. Maharaj! Thereafter, after granting other boons as per his wish, Lord Keshav disappeared from there in the same way as lightning disappears in the clouds. India That is why that pilgrimage is famous in all three worlds by the name Sapta-Charuka. The Charu given for the fire there is more beneficial than one lakh cows, a hundred Rajasuya Yagyas and a thousand Ashwamedhya Yagyas. Rajendra! Return from there and go to a pilgrimage place called Rudrapada. By worshiping Mahadevji there, the male pilgrim gets the fruit of Ashvamedha. 97-100॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥