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mahabharat 3.82.88: इसमें स्नान करने से मनुष्य शीघ्र ही इन्द्रलोक को प्राप्त होता है और समस्त पापों से शुद्ध होकर परम मोक्ष को प्राप्त होता है ॥88॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  3.82.88 
तत्र स्नात्वा नर: क्षिप्रं वासवं लोकमाप्नुयात्।
सर्वपापविशुद्धात्मा गच्छेत परमां गतिम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
इसमें स्नान करने से मनुष्य शीघ्र ही इन्द्रलोक को प्राप्त होता है और समस्त पापों से शुद्ध होकर परम मोक्ष को प्राप्त होता है ॥88॥
 
By bathing in it one soon reaches Indraloka and being purified from all sins one attains the ultimate salvation. ॥ 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)