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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  3.82.87 
ततो गच्छेत धर्मज्ञ विमलं तीर्थमुत्तमम्।
अद्यापि यत्र दृश्यन्ते मत्स्या: सौवर्णराजता:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से उत्तम विमल तीर्थ की यात्रा करनी चाहिए, जहाँ आज भी सोने और चाँदी के रंग की मछलियाँ देखी जा सकती हैं।
 
From there, one should travel to the most excellent Vimal Tirtha, where even today gold and silver coloured fishes can be seen. 87
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)