Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.84-85: राजेन्द्र! वहाँ से भीम के उत्तम स्थान की यात्रा करो! भरतश्रेष्ठ! वहाँ योनितीर्थ में स्नान करने से मनुष्य देवी का पुत्र हो जाता है। उसके शरीर की कांति तपाये हुए स्वर्ण कुण्डल के समान होती है। राजन! उस तीर्थ के दर्शन करने से मनुष्य को सहस्रों पुण्यों का फल प्राप्त होता है। 84-85॥ | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजेन्द्र! वहाँ से भीम के उत्तम स्थान की यात्रा करो! भरतश्रेष्ठ! वहाँ योनितीर्थ में स्नान करने से मनुष्य देवी का पुत्र हो जाता है। उसके शरीर की कांति तपाये हुए स्वर्ण कुण्डल के समान होती है। राजन! उस तीर्थ के दर्शन करने से मनुष्य को सहस्रों पुण्यों का फल प्राप्त होता है। 84-85॥
Rajendra! From there travel to the best place of Bhima! Bharatshrestha! By taking bath in Yonitirtha there, a man becomes the son of the Goddess. His body glow is like a heated golden earring. Rajan! By visiting that pilgrimage, a person gets the fruit of thousands of blessings. 84-85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥