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mahabharat 3.82.78-79: भरतश्रेष्ठ! उस तीर्थ में वसुओं का एक पवित्र सरोवर है। उसमें स्नान करने तथा जल पीने से मनुष्य वसुओं को प्रिय हो जाता है। हे पुरुषश्रेष्ठ! वहाँ सिन्धुत्तम नामक एक प्रसिद्ध तीर्थ है, जो सब पापों का नाश करने वाला है। उसमें स्नान करने से प्रचुर मात्रा में स्वर्ण प्राप्त होता है। 78-79॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 78-79
 
 
श्लोक  3.82.78-79 
तीर्थे चात्र सर: पुण्यं वसूनां भरतर्षभ।
तत्र स्नात्वा च पीत्वा च वसूनां सम्मतो भवेत्॥ ७८॥
सिन्धूत्तममिति ख्यातं सर्वपापप्रणाशनम्।
तत्र स्नात्वा नरश्रेष्ठ लभेद् बहु सुवर्णकम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! उस तीर्थ में वसुओं का एक पवित्र सरोवर है। उसमें स्नान करने तथा जल पीने से मनुष्य वसुओं को प्रिय हो जाता है। हे पुरुषश्रेष्ठ! वहाँ सिन्धुत्तम नामक एक प्रसिद्ध तीर्थ है, जो सब पापों का नाश करने वाला है। उसमें स्नान करने से प्रचुर मात्रा में स्वर्ण प्राप्त होता है। 78-79॥
 
Bharatshrestha! There is a sacred lake of Vasus in that pilgrimage. By taking bath and drinking water in it, man becomes dear to the Vasu Gods. Male best! There is a famous pilgrimage site named Sindhuttam, which is the destroyer of all sins. By taking bath in it one gets abundant amount of gold. 78-79॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)