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mahabharat 3.82.74: हे पुरुषश्रेष्ठ! सभी देवता भगवान दमिक की स्तुति करते हैं। पुरुषसिंह! वहाँ स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। 74॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  3.82.74 
दमी चात्र नरश्रेष्ठ सर्वदेवैरभिष्टुत:।
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र हयमेधमवाप्नुयात्॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! सभी देवता भगवान दमिक की स्तुति करते हैं। पुरुषसिंह! वहाँ स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। 74॥
 
Male best! All the gods praise Lord Damika. Purusha Singh! By taking bath there, one gets the results of Ashwamedha Yagya. 74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)