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mahabharat 3.82.65: वहाँ से तीर्थयात्री को द्वारका जाना चाहिए। उसे नियमपूर्वक भोजन करना चाहिए। पिंडर तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को अधिकाधिक स्वर्ण की प्राप्ति होती है ॥65॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.82.65 
ततो द्वारवतीं गच्छेन्नियतो नियताशन:।
पिण्डारके नर: स्नात्वा लभेद् बहु सुवर्णकम्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से तीर्थयात्री को द्वारका जाना चाहिए। उसे नियमपूर्वक भोजन करना चाहिए। पिंडर तीर्थ में स्नान करने से मनुष्य को अधिकाधिक स्वर्ण की प्राप्ति होती है ॥65॥
 
From there the pilgrim should go to Dwarka. He should follow the rules and eat regularly. By taking bath in Pindar Katirtha, a person gets more and more gold. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)