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mahabharat 3.82.62: शुद्धचित्त मनुष्य को जल के स्वामी वरुण के पवित्र समुद्र में स्नान करके तीन रात्रि तक वहीं रहना चाहिए। प्रतिदिन स्नान करके देवताओं और पितरों को तर्पण करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  3.82.62 
तीर्थे सलिलराजस्य स्नात्वा प्रयतमानस:।
त्रिरात्रमुषित: स्नातस्तर्पयेत् पितृदेवता:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
शुद्धचित्त मनुष्य को जल के स्वामी वरुण के पवित्र समुद्र में स्नान करके तीन रात्रि तक वहीं रहना चाहिए। प्रतिदिन स्नान करके देवताओं और पितरों को तर्पण करना चाहिए।
 
A man of pure mind should bathe in the holy sea of Varuna, the lord of waters, and stay there for three nights. He should bathe every day and offer oblations to the gods and forefathers. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)