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mahabharat 3.82.60-61: तत्पश्चात् सरस्वती और समुद्र के संगम पर जाकर स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान और स्वर्ग का फल मिलता है । भरतश्रेष्ठ ! वह पुण्यात्मा पुरुष अपने तेज से सदैव अग्नि के समान प्रकाशित होता रहता है । 60-61॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 60-61
 
 
श्लोक  3.82.60-61 
ततो गत्वा सरस्वत्या: सागरस्य च संगमे॥ ६०॥
गोसहस्रफलं तस्य स्वर्गलोकं च विन्दति।
प्रभया दीप्यते नित्यमग्निवद् भरतर्षभ॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सरस्वती और समुद्र के संगम पर जाकर स्नान करने से मनुष्य को हजार गोदान और स्वर्ग का फल मिलता है । भरतश्रेष्ठ ! वह पुण्यात्मा पुरुष अपने तेज से सदैव अग्नि के समान प्रकाशित होता रहता है । 60-61॥
 
Thereafter, by going to the confluence of Saraswati and the sea and taking bath, a person gets the fruit of thousand Godan and heaven. Bharatshrestha! That virtuous man always shines like fire with his brilliance. 60-61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)