Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.82.6: तीर्थों के दर्शन से प्राप्त होने वाले धर्म के विषय में मेरे मन में कुछ शंकाएँ हैं। मैं उसका समाधान सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताएँ ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.82.6 
अस्ति मे हृदये कश्चित् तीर्थेभ्यो धर्मसंशय:।
तमहं श्रोतुमिच्छामि तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तीर्थों के दर्शन से प्राप्त होने वाले धर्म के विषय में मेरे मन में कुछ शंकाएँ हैं। मैं उसका समाधान सुनना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताएँ ॥6॥
 
I have some doubts about the religion gained from visiting holy places. I would like to hear its solution. Please tell me. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)