Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.82.54: इन्द्रियों पर संयम रखते हुए नियमित भोजन करते हुए चर्मण्वती (चम्बल) नदी में स्नान करने अथवा शौच-तृप्ति आदि करने से राजा रन्तिदेव द्वारा अनुमोदित अग्निष्टोमयाग का फल प्राप्त होता है ॥54॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  3.82.54 
चर्मण्वतीं समासाद्य नियतो नियताशन:।
रन्तिदेवाभ्यनुज्ञातमग्निष्टोमफलं लभेत्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रियों पर संयम रखते हुए नियमित भोजन करते हुए चर्मण्वती (चम्बल) नदी में स्नान करने अथवा शौच-तृप्ति आदि करने से राजा रन्तिदेव द्वारा अनुमोदित अग्निष्टोमयाग का फल प्राप्त होता है ॥54॥
 
Taking bath in the Charmanvati (Chambal) river while eating regular food while maintaining control over the senses or toilet-satisfaction etc., results in the Agnishtomayagya approved by King Rantidev. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)