Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.82.52-53h: वहाँ से त्रिभुवन नाम से प्रसिद्ध नर्मदा नदी के तट पर जाकर देवताओं और पितरों का तर्पण करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल प्राप्त होता है । 52 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  3.82.52-53h 
नर्मदां तु समासाद्य नदीं त्रैलोक्यविश्रुताम्॥ ५२॥
तर्पयित्वा पितॄन् देवानग्निष्टोमफलं लभेत्।
 
 
अनुवाद
वहाँ से त्रिभुवन नाम से प्रसिद्ध नर्मदा नदी के तट पर जाकर देवताओं और पितरों का तर्पण करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल प्राप्त होता है । 52 1/2॥
 
From there, going to the banks of river Narmada, famous as Tribhuvan, and offering offerings to the gods and ancestors, one gets the results of Agnishtom Yagya. 52 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)