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mahabharat 3.82.49: वहाँ से महाकालतीर्थ जाओ। वहाँ नित्य निवास करो और नित्य भोजन करो। वहाँ कोटितीर्थ में आचमन (तथा स्नान) करने से अश्वमेध्ययज्ञ का फल मिलता है। 49॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  3.82.49 
महाकालं ततो गच्छेन्नियतो नियताशन:।
कोटितीर्थमुपस्पृश्य हयमेधफलं लभेत्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वहाँ से महाकालतीर्थ जाओ। वहाँ नित्य निवास करो और नित्य भोजन करो। वहाँ कोटितीर्थ में आचमन (तथा स्नान) करने से अश्वमेध्ययज्ञ का फल मिलता है। 49॥
 
From there go to Mahakaltirtha. Stay there regularly and eat food regularly. By performing Aachman (and bathing) in Kotitirtha there, one gets the results of Ashwamedhyayagya. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)