Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.44: राजन! जो मनुष्य अगस्त्य सरोवर में जाकर देवताओं और पितरों की पूजा में तत्पर होकर तीन रात्रि तक उपवास करता है, उसे अग्निष्टोमयज्ञ का फल प्राप्त होता है ॥44॥ | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आगस्त्यं सर आसाद्य पितृदेवार्चने रत:।
त्रिरात्रोपोषितो राजन्नग्निष्टोमफलं लभेत्॥ ४४॥
अनुवाद
राजन! जो मनुष्य अगस्त्य सरोवर में जाकर देवताओं और पितरों की पूजा में तत्पर होकर तीन रात्रि तक उपवास करता है, उसे अग्निष्टोमयज्ञ का फल प्राप्त होता है ॥44॥
Rajan! One who goes to Agastya lake and fasts for three nights while being ready to worship the Gods and ancestors, gets the results of Agnishtomayyagya. 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥