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mahabharat 3.82.43: जम्बू मार्ग से लौटकर मनुष्य को तण्डुलिका आश्रम में जाना चाहिए, इससे वह दुर्गति में नहीं पड़ता और अन्त में ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है ॥43॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.82.43 
जम्बूमार्गादुपावृत्य गच्छेत् तन्दुलिकाश्रमम्।
न दुर्गतिमवाप्नोति ब्रह्मलोकं च गच्छति॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जम्बू मार्ग से लौटकर मनुष्य को तण्डुलिका आश्रम में जाना चाहिए, इससे वह दुर्गति में नहीं पड़ता और अन्त में ब्रह्मलोक को प्राप्त होता है ॥43॥
 
After returning from Jambu Marg, one should go to Tandulika Ashram. Due to this he does not fall into misery and ultimately goes to Brahmalok. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)