Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.82.42: वहाँ पाँच रात्रि तक रहने से मनुष्य का अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है, उसे कभी दुर्भाग्य का सामना नहीं करना पड़ता; वह परम सिद्धि प्राप्त करता है ॥42॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.82.42 
तत्रोष्य रजनी: पञ्च पूतात्मा जायते नर:।
न दुर्गतिमवाप्नोति सिद्धिं प्राप्नोति चोत्तमाम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पाँच रात्रि तक रहने से मनुष्य का अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है, उसे कभी दुर्भाग्य का सामना नहीं करना पड़ता; वह परम सिद्धि प्राप्त करता है ॥42॥
 
By staying there for five nights, a man's conscience becomes pure. He never faces misfortune; he achieves supreme success. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)