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mahabharat 3.82.41: जम्बू मार्ग देवताओं, ऋषियों और पितरों द्वारा सेवित तीर्थस्थान है। वहाँ जाकर मनुष्य समस्त इच्छित सुखों को प्राप्त करता है और अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.82.41 
जम्बूमार्गं समाविश्य देवर्षिपितृसेवितम्।
अश्वमेधमवाप्नोति सर्वकामसमन्वित:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जम्बू मार्ग देवताओं, ऋषियों और पितरों द्वारा सेवित तीर्थस्थान है। वहाँ जाकर मनुष्य समस्त इच्छित सुखों को प्राप्त करता है और अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त करता है ॥ 41॥
 
Jambu Marg is a pilgrimage place served by the Gods, sages and ancestors. Going there, a man gets all the desired pleasures and gets the fruits of performing Ashwamedha Yagna. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)