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mahabharat 3.82.40: वहाँ इन्द्रियों को वश में रखते हुए तथा नियमित आहार करते हुए बारह रात तक निवास करो और तीर्थ की परिक्रमा करके जम्बू मार्ग को जाओ ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.82.40 
उष्य द्वादशरात्रं तु नियतो नियताशन:।
प्रदक्षिणमुपावृत्य जम्बूमार्गं समाविशेत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ इन्द्रियों को वश में रखते हुए तथा नियमित आहार करते हुए बारह रात तक निवास करो और तीर्थ की परिक्रमा करके जम्बू मार्ग को जाओ ॥40॥
 
Stay there for twelve nights while controlling the senses and eating regular food and after circling the pilgrimage, go to Jambu Marg. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)