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mahabharat 3.82.39: पुष्कर जाना अत्यंत दुर्लभ है, पुष्कर में तप करना अत्यंत दुर्लभ है, पुष्कर में दान देने का अवसर मिलना तो और भी दुर्लभ है और वहाँ निवास करने का सौभाग्य प्राप्त होना अत्यंत कठिन है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.82.39 
दुष्करं पुष्करे गन्तुं दुष्करं पुष्करे तप:।
दुष्करं पुष्करे दानं वस्तुं चैव सुदुष्करम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
पुष्कर जाना अत्यंत दुर्लभ है, पुष्कर में तप करना अत्यंत दुर्लभ है, पुष्कर में दान देने का अवसर मिलना तो और भी दुर्लभ है और वहाँ निवास करने का सौभाग्य प्राप्त होना अत्यंत कठिन है ॥39॥
 
It is extremely rare to go to Pushkar, it is extremely rare to perform penance in Pushkar, it is even more rare to get the opportunity to give alms in Pushkar and it is extremely difficult to have the good fortune of residing there. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)