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mahabharat 3.82.38: तीन श्वेत पर्वत शिखर, तीन झरने और तीन पुष्कर - ये आदि सिद्ध तीर्थ हैं। इन्हें कब और क्यों तीर्थ माना गया? यह हम नहीं जानते॥ 38॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.82.38 
त्रीणि शृङ्गाणि शुभ्राणि त्रीणि प्रस्रवणानि च।
पुष्कराण्यादिसिद्धानि न विद्मस्तत्र कारणम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
तीन श्वेत पर्वत शिखर, तीन झरने और तीन पुष्कर - ये आदि सिद्ध तीर्थ हैं। इन्हें कब और क्यों तीर्थ माना गया? यह हम नहीं जानते॥ 38॥
 
Three white mountain peaks, three springs and three Pushkars - these are the Adi Siddha Tirthas. When and why were these considered as Tirthas? We do not know this.॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)