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mahabharat 3.82.34-35h: राजन! जिस प्रकार भगवान मधुसूदन (विष्णु) समस्त देवताओं के आदि हैं, उसी प्रकार पुष्कर को समस्त तीर्थों का आदि कहा गया है। 34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  3.82.34-35h 
यथा सुराणां सर्वेषामादिस्तु मधुसूदन:॥ ३४॥
तथैव पुष्करं राजंस्तीर्थानामादिरुच्यते।
 
 
अनुवाद
राजन! जिस प्रकार भगवान मधुसूदन (विष्णु) समस्त देवताओं के आदि हैं, उसी प्रकार पुष्कर को समस्त तीर्थों का आदि कहा गया है। 34 1/2॥
 
Rajan! Just as Lord Madhusudan (Vishnu) is the beginning of all gods, similarly Pushkar is said to be the beginning of all pilgrimages. 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)