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mahabharat 3.82.32-33h: हे भारत! जो मनुष्य सायंकाल और प्रातःकाल हाथ जोड़कर तीनों पुष्करों का स्मरण करता है, वह मानो समस्त तीर्थों में स्नान करके मुँह धो लेता है।   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  3.82.32-33h 
सायं प्रात: स्मरेद् यस्तु पुष्कराणि कृताञ्जलि:॥ ३२॥
उपस्पृष्टं भवेत् तेन सर्वतीर्थेषु भारत।
 
 
अनुवाद
हे भारत! जो मनुष्य सायंकाल और प्रातःकाल हाथ जोड़कर तीनों पुष्करों का स्मरण करता है, वह मानो समस्त तीर्थों में स्नान करके मुँह धो लेता है।
 
Bharat! One who remembers the three Pushkars with folded hands in the evening and morning, is as if he has bathed and rinsed his mouth at all the holy places. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)