Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.30-31h: उससे विद्वान् पुरुष अश्वमेधयज्ञ का फल प्राप्त करता है। श्रेष्ठ! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र, जो कोई महात्मा ब्रह्माजी के तीर्थ में स्नान करता है, वह फिर किसी अन्य योनि में जन्म नहीं लेता। 30 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेनैव प्राप्नुयात् प्राज्ञो हयमेधफलं नर:।
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्रा वा राजसत्तम॥ ३०॥
न वै योनौ प्रजायन्ते स्नातास्तीर्थे महात्मन:।
अनुवाद
उससे विद्वान् पुरुष अश्वमेधयज्ञ का फल प्राप्त करता है। श्रेष्ठ! ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र, जो कोई महात्मा ब्रह्माजी के तीर्थ में स्नान करता है, वह फिर किसी अन्य योनि में जन्म नहीं लेता। 30 1/2॥
Through that, a learned man gets the results of Ashvamedhyayagya. The best! Brahmin, Kshatriya, Vaishya or Shudra, whoever takes bath in the shrine of Mahatma Brahmaji, is never born again in any other life. 30 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥