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mahabharat 3.82.28: भीष्म! पुष्कर में जाकर कम से कम एक ब्राह्मण को भोजन कराओ। इस पुण्य कर्म से मनुष्य को इस लोक में तथा परलोक में भी सुख मिलता है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.82.28 
अप्येकं भोजयेद् विप्रं पुष्करारण्यमाश्रित:।
तेनासौ कर्मणा भीष्म प्रेत्य चेह च मोदते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! पुष्कर में जाकर कम से कम एक ब्राह्मण को भोजन कराओ। इस पुण्य कर्म से मनुष्य को इस लोक में तथा परलोक में भी सुख मिलता है॥ 28॥
 
Bhishma! Go to Pushkar and feed at least one Brahmin. By doing this pious act, a man gets happiness in this world as well as in the next.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)