Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.82.27: विद्वान कहते हैं कि जो व्यक्ति वहाँ स्नान करके देवताओं और पितरों की पूजा में तत्पर रहता है, उसे अश्वमेध से दस गुना अधिक फल मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.82.27 
तत्राभिषेकं य: कुर्यात् पितृदेवार्चने रत:।
अश्वमेधाद् दशगुणं फलं प्राहुर्मनीषिण:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
विद्वान कहते हैं कि जो व्यक्ति वहाँ स्नान करके देवताओं और पितरों की पूजा में तत्पर रहता है, उसे अश्वमेध से दस गुना अधिक फल मिलता है।
 
The wise say that one who takes a bath there and remains engaged in worshipping the gods and forefathers gets ten times more benefits than the Ashwamedha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)