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mahabharat 3.82.25: महाराज! उस तीर्थ में भगवान ब्रह्माजी प्रतिदिन कमल के आसन पर बड़े प्रसन्नतापूर्वक निवास करते हैं॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.82.25 
तस्मिंस्तीर्थे महाराज नित्यमेव पितामह:।
उवास परमप्रीतो भगवान् कमलासन:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस तीर्थ में भगवान ब्रह्माजी प्रतिदिन कमल के आसन पर बड़े प्रसन्नतापूर्वक निवास करते हैं॥25॥
 
Maharaj! In that pilgrimage, Lord Brahmaji resides daily with great happiness in lotus posture. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)