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mahabharat 3.82.24: जो दृढ़ मन वाला मनुष्य पुष्कर तीर्थ यात्रा की इच्छा रखता है, उसके सभी पाप जो उसे स्वर्ग जाने से रोकते हैं, मिट जाते हैं और स्वर्ग में उसकी पूजा होती है।   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.82.24 
मनसाप्यभिकामस्य पुष्कराणि मनस्विन:।
पूयन्ते सर्वपापानि नाकपृष्ठे च पूज्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो दृढ़ मन वाला मनुष्य पुष्कर तीर्थ यात्रा की इच्छा रखता है, उसके सभी पाप जो उसे स्वर्ग जाने से रोकते हैं, मिट जाते हैं और स्वर्ग में उसकी पूजा होती है।
 
A man with a strong mind who wishes to go to Pushkar pilgrimage, all his sins that prevent him from going to heaven are erased and he is worshiped in heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)