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mahabharat 3.82.18: जो मनुष्य तीन रात्रि उपवास नहीं करता, तीर्थों में नहीं जाता, तथा स्वर्ण और गौओं का दान नहीं करता, वह दरिद्र हो जाता है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.82.18 
अनुपोष्य त्रिरात्राणि तीर्थान्यनभिगम्य च।
अदत्त्वा काञ्चनं गाश्च दरिद्रो नाम जायते॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य तीन रात्रि उपवास नहीं करता, तीर्थों में नहीं जाता, तथा स्वर्ण और गौओं का दान नहीं करता, वह दरिद्र हो जाता है॥18॥
 
A man becomes poor because he does not fast for three nights, does not visit holy places, and does not give donations of gold and cows.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)