Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.14: परन्तु हे राजन! गरीब लोग इन यज्ञों को नहीं कर सकते, क्योंकि इनमें बहुत-सी सामग्री लगती है। नाना प्रकार की सामग्री एकत्रित करने से इनका आकार बहुत बढ़ जाता है। ॥14॥ | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न ते शक्या दरिद्रेण यज्ञा: प्राप्तुं महीपते।
बहूपकरणा यज्ञा नानासम्भारविस्तरा:॥ १४॥
अनुवाद
परन्तु हे राजन! गरीब लोग इन यज्ञों को नहीं कर सकते, क्योंकि इनमें बहुत-सी सामग्री लगती है। नाना प्रकार की सामग्री एकत्रित करने से इनका आकार बहुत बढ़ जाता है। ॥14॥
But O King! Poor people cannot perform these yagnas because they require a lot of materials. By collecting various types of materials, their size increases a lot. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥