Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.82.128: हे मनुष्यों के स्वामी! जहाँ मुनियों का समागम समाप्त हो गया है, उस अवसान तीर्थ में जाकर मनुष्य एक हजार गौदान का फल प्राप्त करता है।।128।। | mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! जहाँ मुनियों का समागम समाप्त हो गया है, उस अवसान तीर्थ में जाकर मनुष्य एक हजार गौदान का फल प्राप्त करता है।।128।।
O Lord of men! By going to the Avasan Tirtha where the sessions of the sages have ended, a man attains the fruit of donating a thousand cows. 128.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि तीर्थयात्रापर्वणि पुलस्त्यतीर्थयात्रायां द्वॺशीतितमोऽध्याय:॥ ८२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत तीर्थयात्रापर्वमें पुलस्त्यकथित तीर्थयात्राविषयक बयासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥