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mahabharat 3.82.12: राजन! जो क्रोध नहीं करता, सत्यवादी है, व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करता है तथा सभी प्राणियों के प्रति आत्मसम्मान रखता है, वही तीर्थयात्रा का फल पाता है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 82: भीष्मजीके पूछनेपर पुलस्त्यजीका उन्हें विभिन्न तीर्थोंकी यात्राका माहात्म्य बताना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.82.12 
अक्रोधनश्च राजेन्द्र सत्यशीलो दृढव्रत:।
आत्मोपमश्च भूतेषु स तीर्थफलमश्नुते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! जो क्रोध नहीं करता, सत्यवादी है, व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करता है तथा सभी प्राणियों के प्रति आत्मसम्मान रखता है, वही तीर्थयात्रा का फल पाता है॥12॥
 
Rajan! One who does not have anger, who is truthful and strictly observes fasts and who has self-respect towards all living beings, only he gets the fruits of pilgrimage. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)